Tuesday, May 8, 2012


बहुत दिन बाद मैं कुछ लिख रही हूँ।पिछले कुछ महीनो से काम में इतना व्यस्त थी की ब्लॉग्गिंग की तरफ ध्यन नहीं गया.अब जब लिखने बैठी हूँ तो सोच रही हु की क्या लिखू मैं.चलिए बताती हूँ की मैं क्यों नहीं ब्लॉग लिख रही थी। इसी साल जनवरी में मेरे छोटे भाई की शादी हुई और फिर होली के बाद मैं मौसी बनी।हाँ जी, मेरी बड़ी बहन को एक बहुत cute और sweet सा लड़का हुआ है।अभी तो कितना छोटा है लेकिन मुझे बहुत प्यारा है।उसका नाम हमने निमिष रखा है।उसके साथ ही दिन भर खेलते रहती हूँ।
बच्चों के साथ खेलना कितना अच्छा लगता है न.मुझे तो छोटे बच्चे बहुत पसंद हैं।और जब वो टूक टूक देखते हैं तो कित्ते प्यारे 
लगते हैं न.पहले मुझे इतने छोटे बच्चों को गोदी में लेते हुए बहुत डर लगता था।मुझे याद है की जब मेरे बड़े भैया को पहली बेटी हुई थी तो मैं तो उसे 6 महीने तक गोद में लेते हुए बहुत डरती थी।कभी कभी ही गोद में लेती थी।लेकिन अब डर नहीं लगता मुझे।अब तो मुझे उन्हें गोदी से नीचे रखने 
का मन ही नहीं करता।
बच्चों के साथ खेलते खेलते हम भी बच्चे बन जाते हैं। मेरे पापा तो जब भी निमिष को गोदी में लेते हैं तो वो भी एकदम 
बच्चे से बन जाते हैं।मुझे लगता है की पापा भी उस समय बच्चे बन जाते हैं।

निमिष के लिए कुछ गाने जो मुझे अच्छा लगता है यहाँ पर लगा रही हूँ।आशा है की आपको भी ये गाने पसंद आयेंगे।


Tuesday, March 8, 2011

टुटा दिल

काफी दिनों के बाद ब्लॉग लिख रही हूँ..........कुछ बैठे बैठे कभी दफ्तर में, तो कभी घर में कुछ लिख लेती हूँ................ऐसे में कुछ जो इधर लिखी हूँ.......जो भी है....अच्छा या बुरा.......



दिन के बाद फिर वही बोझिल सी शाम होगी 
अश्क होंगे, तन्हाई होगी, यादें होंगी...
जिंदगी फिर से ग़म के प्यालों के नाम होगी 

.....

आँखों को हमेशा किसी का इंतज़ार होता है 
दिल किसी के लिए अक्सर बेताब होता है
मानता नहीं दिल सौ बातों से भी 
हर पल वही सपने संजोता है
जिसके टूट जाने पे भी सच होने का इंतज़ार होता है ..

Tuesday, January 4, 2011

तन्हाई से तंग आकार

कल तन्हाई से तंग आकार,
युहीं बहुत देर तक तुम्हारा नाम पुकारती रही,
तुम्हे आवाज़ देती रही, रोती रही..
हर आवाज़ मेरी इधर उधर ठोकरें खाने के बाद
मर जा रही थीं,
मैं गुमसुम होके चुपचाप बैठ गयी
आँखों में नमी थी, दिल में दर्द,
वो दर्द जो हमेशा तुम्हे याद करने के बाद
चला आता है.
वो दर्द जिसके कारण तन्हाई में,
तुम्हे याद कर के रो भी लेती हूँ मैं.
कभी आखों से आंसू निकलते हैं,
तो कभी दिल रोता है
आखों के आंसू तो दिखाई देते हैं,
कुछ अपने, कुछ दोस्त, पास आकार सहारा देते हैं,
आंसू पोछते हैं,
हँसते हैं, हंसाते हैं मुझे
पर जब दिल रोता है
किसी को भी खबर नहीं होती
और मैं बस घुटती हुई सी रह जाती हूँ.

Thursday, December 30, 2010

नए साल में एक संकल्प लें !

आने वाला नया साल लाये खुशियाँ नयी
सबके जीवन में आये सुख समृधि औ शान्ति
बीते वर्ष जो न हो पाया,
पायें सब उसे इस वर्ष
कुछ नया करने को ढाने
कुछ अच्छा करने का संकल्प लें
अपने माता पिता के अधूरे सपनों को
पूरा करने का संकल्प लें
ये साल आया है नयी रौशनी लेकर
आयें इसे बेहतर बनायें.
नयी कसमें ले इस साल, नयी उर्जा से करें काम,
आइये मिलकर स्वागत करें
इस नए साल का हम!



आप सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं !






HAPPY NEW YEAR 2011

Tuesday, December 28, 2010

फिर से एक शुरुआत कविता के साथ

पता नहीं क्यूँ मेरा पुराना ब्लॉग(http://prernakepal.blogspot.com/) ब्लोक हो गया है.मैं लोगिन नहीं कर पा रही.इसलिए नए ब्लॉग में लिखना शुरू किया है मैंने.
आज फिर एक छोटी सी कविता जैसा कुछ लिखने की कोशिश की थी.पेश है आपके सामने 


दुनिया में आये थे वे कुछ अरमा लिए हुए
दिल को अपने बहुत समझाया
पर दुनिया में खुद को अजनबी पाया
फिर अपनों की तलाश में वो दुनिया से चले गए!

उदासी सही नहीं जाती


ये चंद लाईने मैंने युहीं ऑफिस से आते वक्त लिख डाली..शुरुआत की है शायद आपको पसंद आये या न आये, कह तो नहीं सकती.

आ जाओ अब की तन्हाई सही नहीं जाती 
टूट कर फिर से चाहो मुझे 
की जुदाई अब सही नहीं जाती
सुना है तुम्हारी बातों से लोग खुश हो जाते हैं
ये बात है तो बात करो मुझसे भी
उदासी मुझसे अब सही नहीं जाती..

खुशी के पल

खुशी के पल का ये पहला पोस्ट है.ब्लॉग से अनजान हूँ.लेकिन सुना बहुत है ब्लॉग के बारे में.सोचा मैंने की एक ब्लॉग मैं भी निकल के देखूं. लोग पढ़ते हैं या नहीं.वैसे Writer मुझमे कोई तो दूर दूर तक नहीं है लेकिन फिर भी कभी दिल आया तो कुछ लिख ही दूँ मैं भी.भले ही पढ़ा न जा पाए मेरा लिखा.

अपने सहकर्मियों को देखती हूँ ब्लॉग पढ़ते रहते हैं.ज्यादातर English ब्लॉग.मेरी आदत भी लग गयी थी ब्लॉग पढ़ने के.हिन्दी के ब्लॉग से मैं ज्यादा परिचित नहीं थी, हालांकि हिन्दी में मेरी रूचि हमेशा से ही रही है.मुंशी प्रेमचंद्र जिन्हें भारत का shakespere कहा जता है उनकी कहानियां मुझे काफी ज्यादा पसंद हैं.कमलेश्वर, अमृता प्रीतम और शिवानी की भी किताबें पसंद आती हैं.

ब्लॉग में लिखने के लिए मुझे सोचना पड़ेगा.क्या लिखूं अभी तो समझ में नहीं आ रहा. देखती हूँ अगर कुछ ख्याल दिमाग में आया तो ब्लॉग पे ले आउंगी उस ख्याल को.

धन्यवाद

प्रेरणा